Sham-e-Gam

Talat Mehmood is one my favorite singers of all time, and Sham-e-gam ki kasam is by far is most soulful song of his. Majrooh Sultanpuri wrote the song for the 1953 film “Footpath” … and the poetry is equally matched by Khayyam’s music. Here are the lyrics:

शाम-ए-गम की कसम, आज गमगीं हैं हम,
आ भी जा आभी जा आज मेरे सनम।
शाम-ए-गम की कसम…

दिल परेशान है, रात वीरान है,
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम।
शाम-ए-गम की कसम…

चैन कैसा जो पहलू मे तू ही नही,
मार डाले ना दर्द-ए-जुदाई कहीं।
ऋत हसीं है तो क्या, चांदनी है तो क्या,
चांदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम।
शाम-ए-गम की कसम…

अब तो आजा कि अब रात भी सो गई,
ज़िन्दग़ी गम के सहरा मे खो गई,
धुंढ़ती है नज़र, तू कहाँ है मगर,
देखते देखते आया आँखों मे दम।
शाम-ए-गम की कसम…

And you can listen to the song here: http://www.saavn.com/p/song/hindi/foot+path/shaam-e-gham+ki/SARfcwdkUmY