Na karo …
I feel like posting another self-composed one. A gazals this time:
अपने दीदार को मेरी आदत न करो
यूँ दीवानों-सी मेरी हालत न करो।
न जाओ सहर से पहले उठकर तुम
या मिलने की इनायत न करो।
मेरे दिल को संभलने की राह बतलाओ
या आँखों से यूँ शरारत न करो।
न पिलाओ आँखों से जाम भर-भर कर
या बहकने की शिकायत न करो।
मेरी मौत को मुकर्रर समझो
या मुझसे यूँ मोहब्बत न करो।