Aaj hi hoga
मनाना चाहता है तो मान ले,
त्योहार का दिन आज ही होगा।
उमंगे यूँ अकारण ही नही उठती,
न अनदेखे इशारों पर कभी यूँ नाचता है मन,
खुले-से लग रहे हैं द्वार मन्दिर के,
बढ़ा पग मूर्ती के शृंगार का दिन आज ही होगा।
मनाना चाहता है तो मान ले,
त्योहार का दिन आज ही होगा।