Kavi

New poem, just written. And quite satisfying like the last one 🙂

गुरु बोले – “जा खोज के आ
कि फूल है क्या?”
इक फूल दिखा,
मै मुस्काया।
उसके सौरभ को,
प्राणों मे भर लाया।
मन सुख मे नत हो आया,
तब मैनें जाना – फूल है क्या।

जब लौटा, तो गुरु ने पूछा –
“बता शिष्य कि फूल है क्या?”

मन ने सुन्दर आकार लिया,
पर शब्द रुके मुख तक आकर।
क्या पीत-श्वेत-लोहित मरमर,
यह कह देंगे जो मुझे दिखा?
कैसे समझाऊँ सौरभ को
जिसने प्राणों मे रस घोला?

शब्द खेलते आँख मिचौली,
बुद्धी धूंडती शब्दों को।
कभी तीव्रता से जा पकडे,
पर पाए फ़िका उनको।
कभी ऊंघते शब्द स्वयं ही,
आ जाते सम्मुख मेरे।
पर उत्तर फिर भी दे न सका
आखें औ’ सिर नत मेरे।

गुरु मुस्काए।
मुझको देखा।
कुछ कहा नहीं,
और चले गए।

मैने माना कि विफल बुद्धी।
शब्दों के होते मुक्त प्राण।
बंधन मे उनको बांधोगे,
तो भागेंगे वे बचा प्राण।
मान बुद्धी को विफल अगर,
उस फूल मे मन को रम लोगे,
तो शब्द तितलियों से आकर,
खुद ही मन पर मंडराएँगे।
बिन लगाम के बुद्धी की,
तब गीत कण्ठ गाए मेरा।
जो जिह्वा से उस पल निकला,
वह सहज बनी मेरी कविता।

मैं बहुत खुशी से लहराया –
“कह दिया है मैने फूल है क्या।”
पर दो पल रुक कर सोचो तो,
क्या मैं हूँ कवि इस कविता का?

8 thoughts on “Kavi

  1. Rashmi says:

    nice….

    one of my all time favorite song by gulzar is on similar lines…. humne dekhee hai un aankon ki mahakti khushboo …. sirf ahsaas hai yeh rooh se mahsoos karo……

    words are only medium ….
    and its funny that as we grow..we rely so much on them ….and you will realise as you grow specially in to relations that the longer you spend time in a realtion, the less words you really need.

  2. Jeet says:

    Cool che bhai.. good concept.. and great words too.

  3. Tripti says:

    very nice…….

  4. @Rashmi Tai … Did reply to you in detail… didn’t I? 😀 and thanks for the insight 🙂

    @Jeet dhanyavaad rahega!

    @Tripti Dhanyavaad 🙂

  5. Inklets says:

    hey!

    beautifully expressed! 🙂

  6. Inklets says:

    and uh.. btw, i dont have issues with RSS feed, but i really dont know how to do tht on wordpress! (yeah, u can gimme those shocked icons!!)

    p.s: thanx for ur visit on the blog! 🙂

  7. @Inklets

    thanks! 🙂 And about RSS, I’ll tell you shortly.

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